बेमेतरा 27 सितम्बर 2022/ रेबिज एक विषाणु जनित बीमारी है , जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है । मनुष्यो में यह रेबिज पीड़ित जानवर मुख्यतः कुत्ते , बिल्ली , नेवले , बंदर , भालू के काटने या खरोंच से फैलता है।
रेबिज संक्रमित व्यक्ति में लक्षण – घाव के स्थान पर दर्द या खुजली होना, तेज बुखार, दो चार दिन के लिए स्थाई सिरदर्द होना, पानी से भय होना ( हाईड्रोफोबिया ) . तेज प्रकाश अथवा शोर / ध्वनि बरदाश्त करने में असमर्थ होना, मतिभ्रम होना , व्यवहार में परिवर्तन होना, बेहोशी आना हो सकते है ।
प्रतिवर्ष 28 सितम्बर को रेबिज रोकथाम हेतु सभी को जागरूक करने के उद्देश्य से ” विश्व रेबिज दिवस मनाया जाता है साथ ही इस दिन महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर की पुण्य तिथि होती है जिन्होने रेविज के प्रथम टीके का अविष्कार किया था ।
रेविज बीमारी को समय रहते टीकाकरण से रोका जा सकता है पर एक बार रेविज विमारी होने पर मृत्यु निश्चित है ।
बचाव हेतु क्या करे : – घाव को बहते पानी के नीचे साबुन से 10 से 15 मिनट तक घोए, कीटाणुनाशक या एंटी सेप्टिक जैसे टिंचर आयोडिन पोविडिन आयोडिन / डेटाल लगाये, कुत्ता , बिल्ली , व
अन्य पालतु जानवरों को पशु चिकित्सालय में रेबिज का टीकाकरण करायें, चिकित्सक के निर्देशानुसार एन्टी रेविज टीकाकरण नियमित रूप से करायें।
बचाव हेतु क्या ना करे-कुत्ता / जानवर काटने पर घाव को ना ढकें , खुले हाथों से घाव को न छुएं , मिट्टी , मिर्ची , तेल , चॉक , हल्दी , जड़ी – बुटी इत्यादि ना लगाये , घाव को ना जलाएं . अंधविश्वास या पौराणिक कहावतों पर भरोसा ना करें ।



