दुर्ग जिला के दुर्ग शहर से दो किलोमीटर कि दूरी पर स्थित पावन धारा पोटिया कला आज इन दिनों मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पढ़ रहा हैं पोटिया कला वार्ड क्रं 54 बहुत ही घनी आबादी एवं दुर्ग शहर का सबसे बड़ा वार्ड कहलाता है
पोटिया कला मोतीलाल नेहरू नगर के बस्ती के नालियों का हाल बेहाल
आज हम आपको ऐसे वार्ड के बारे मे अवगत करायेगे जहां वार्ड के नागरिकों ने अपनी वार्ड कि समस्याओं से जूझ रहे हैं
वार्ड पार्षद द्वारा वार्ड कि समस्याओं से अवगत होते हुए भी समस्याओं से अनजान बनने कि कोशिश कर रहे हैं उसके बाद भी इस क्षेत्र के वार्डवासियों को काफी समस्याओं का सामना करना पढ़ रहा हैं आज तक वार्ड विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति किया गया हैं।
पोटिया कला चौक में चारों ओर गंदगी एवं अवस्था का आलम स्ट्रीट लाइटें बंद अवैध तरीके से दुकानों का संचालन
इस क्षेत्र लोग बहुत ही परेशान नजर आ रहें हैं जबकि इस वार्ड में जनप्रतिनिधियों का आना जाना लगा रहता है
जब इस वार्ड के लोग अपनी समस्याओं को लेकर पार्षद के पास जाते हैं तो पार्षद द्वारा यह सुनने को मिलती हैं कि निगम के पास फंड नहीं है मैं शासन प्रशासन को अवगत करा दिया हूं लेटर बनाकर भेज दिया हूं जब वहां से प्रस्ताव पारित होगा फिर जो काम आप लोग बोले रहें उसे पुरा कर दिया जायेगा
इस तरह वार्डवासियों को गोलमोल जवाब देकर वापस भेज दिया जाता हैं। और वार्डवासियों को नाराज होकर वापस लौटना पढ़ता हैं
मीडिल स्कूल भवन जर्जर

जबकि खासबात तो यह हैं कि इनके विधायक भी दस साल से दुर्ग शहर में विधायक रुप के रूप में विराजमान हैं उसके बाद भी इस क्षेत्र के वार्डवासियों को विकास के नाम केवल झुठा आश्वासन ही मिल रहा हैं।आज तक इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई खास विकास कार्य नहीं हुआ हैं।
आज शासन प्रशासन द्वारा वार्ड के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत कार्य योजना तैयार होते हैं उनके बाद भी वार्ड समस्याओं से घिरा हुआ रहता हैं। समझ से बाहर हैं।पोटिया कला वार्ड क्रं 54 में बच्चों के खेलने के लिए एक भी गार्डन उद्यान नहीं हैं।
ट्रेचिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर पार्षद एवं निगम प्रशासन द्वारा अभियान

और जो एक गार्डन का निर्माण किया है वह भी लगभग एक साल हो चुका हैं। जिसमें अभी तक वहां किसी भी प्रकार का झुला तो दूर कि बात वहां लोगों के बैठने के लिए एक कुर्सी भी नहीं लगा है
इस वार्ड के पार्षद द्वारा खराब रोड़ का संधारण , रोड़ के गढ्ढो को भरने का काम भी आज तक नहीं हो पा रहा हैं।
जिससे बहुत से लोग उस गढ्ढे में गिरने से जख्मी भी हुई बहुत ही गंभीर एवं चिंता का विषय है
तालाब के चारों ओर गंदगी एवं तालाब में दलदल किचड़ भरे रहने से लोगों को जान कि जोखिम

ऐसा लग रहां है मानो बीना समाग्री के गार्डन उद्यान कैसे बन गये या तो गार्डन के खेलकूद के समाग्री को लगाने के लिए भूल गए या फिर कहीं खेल कूद समाग्री को कहीं और दुसरे जगह तो नहीं बेच दिये गये
पोटिया कला भाठा पारा का गार्डन उद्यान बीना झूला कुर्सी के सो पीस
इस वार्ड में एक भी जगह बच्चों के खेलकूद के लिये कहीं पर भी झुले कि व्यवस्था याने झुला कहीं पर भी नहीं लगा है
इस वार्ड में बच्चों के पढ़ाई के लिये आठवीं तक ही स्कूल संचालित होता हैं। जबकि इस क्षेत्र के पालकों द्वारा कई बार शासन प्रशासन को बारहवी तक स्कूल संचालित करने के लिए जन दर्शन से लेकर नेताओं को आवेदनों के माध्यम से अवगत किते हैं।
लेकिन आगे स्कूल तो दूर कि बात कक्षा छठवीं से आठवीं तक कि स्कूल भवन बहुत हीं जर्जर अवस्था में हैं। बाउंड्री वॉल कि दिवाल गीरा हुआ हैं।
जिससे कुछ उपद्रवियों द्वारा स्कूल के अंदर प्रवेश कर जाकर नशापान करते नजर आते हैं आज ऐसा दिन देखने को मिल रहां हैं।
पोटिया कला चौक में देशी शराब दुकान संचालित
स्कूल होते हुवे भी आज बच्चों को प्राथमिक शाला और मीड़िल स्कूल दोनों कक्षाओं को एक ही स्कूल में संचालित करना पढ़ रहा हैं
इस स्थिति को , देखते हुए कई पालकों ने अपने बच्चों को दुसरे स्कूलों में दाखिला करा लिया गया है
दशहरा व खेल मैदान में पानी एवं हाईमास्क लाईट कि मांग वार्ड वासियों द्वारा केवल सपना बनकर रह गया

आज इस क्षेत्र के बच्चों को स्कूलों कि जर्जन भवनों के कारण पढ़ाई से वंचित होना पढ़ रहा हैं जिससे बच्चों के भविष्य अंधकारमय होने लगा हैं। और न ही इस बच्चों के भविष्य के बारे में पार्षद तो दूर कि बात शिक्षा अधिकारी भी आज तक इस स्कूल कि सुध लेने नहीं पहुंचे
इस वार्ड में लोगों के निस्तारी के लिए दो तालाब हैं।जोकि दोनों तालाब कि हलात बहुत ही खराब हैं। एक वर्ष पहले शीतला तालाब में तालाब के अंदर का किचड़ को निकालने एवं गहराई करण कार्य किया वह भी पुरी तरह से गहराई एवं सफाई के नाम से केवल खानापूर्ति किया गया
पोटिया चौक के चारों ओर अवैध अतिक्रमणों के कारण चौक संकरा होने से दुर्घटना होने कि संभावना
आज भी उस तालाब कि सफाई अच्छे से नहीं हो पाया जिससे उस क्षेत्र के लोगों निस्तारित करते समय अक्सर बीमार होने कि खतरा लगातार बनी रहती है
इस वार्ड के मुक्तिधाम का भी हालत बहुत ही खराब हैं। बरसात के दिनों में मुक्तिधाम जाने के लिए इस क्षेत्र के लोगों को किचड़ भरे दलदल से होकर जाना पड़ता हैं वार्डवासियों द्वारा मुक्तिधाम को सौंदर्यीकरण करने एवं सीर्मेटी करण रोड़ के बनानें को लेकर कई बार शासन प्रशासन को अवगत किये
लेकिन आज तक मुक्तिधाम कि निर्माण तो दूर कि बात मुक्तिधाम तक जाने के लिए रोड़ तक भी नहीं बन पाया
पोटिया कला के गौठान कि हालत बहुत ही खराब एवं चारों तरफ गंदगी ही गंदगी

इस वार्ड के स्ट्रीट लाइटें अधिकतर बंद रहने से वार्डवासियों के घरों में चोरी होने का भय लगातार बनी रहती है
पोटिया कला में लगभग बीस वर्षों से ट्रेचिंग ग्राउंड में साठ वार्ड़ो का कचरा लाकर यहां डंप करने के साथ ही उस कचड़े को आग के हवाले कर दिया जाता हैं। जिससे धूवे के रुप में उड़ने वाले जहरीले गैसे बदबूदार कचड़े से बहुत ही परेशानियों और अक्सर लोगों को बीमार होने का खतरा लगातार बनी रहती है
पोटिया कला के क्रांति चौक रोड़ के बीचों बीच गढ्ढे होने से दुर्घटना होने कि भय लगातार

वार्ड पार्षद द्वारा आज तक इस कचड़े ट्रेचिंग ग्राउंड को दुसरे जगहों पर स्थानांतरित करने को लेकर किसी प्रकार का कोई पहल नहीं किए गये साथ ही नगर निगम के अधिकारियों ने वार्डवासियों को यहां से ट्रेचिंग ग्राउंड को हटाने को लेकर चार माह का समय लिया हैं।
क्या अपने समय सीमा के अंतर्गत हटा लिए जायेंगे या फिर इस वार्ड के कुछ रसुखदारो के माध्यम से लोगों को झूठी आश्वासन देकर इस क्षेत्र के लोगों को कहीं गुमराह तो नहीं किया जा रहा है

आज पोटिया चौक को झुग्गी झोपड़ी बस्ती या कुंदरा पारा नाम से लोग जानते हैं।लेकिन असलियत में इस क्षेत्र का नाम सन् 1984 में स्व.मोती लाल वोरा के द्वारा दुर्ग के गांधी चौक के मोहल्ले वासियों को यहां लाकर बसाया गया था तब उस समय इस मोहल्ले का मोतीलाल नेहरू नगर पोटिया कला चौक के नाम से नामकरण किया गया था
इसलिए इस क्षेत्र के वार्ड वासियों द्वारा पुनः इस नाम को स्थापित करने को लेकर वार्ड पार्षद से लेकर आयुक्त एवं महापौर को आवेदन के माध्यम से अवगत कराया गया साथ ही इस चौक में स्व. मोतीलाल वोरा का मूर्ति स्थापित करने कि मांग किया गया
पोटिया चौक मोतीलाल नेहरू नगर के बस्ती में कचड़े रोड़ पर फैले हुए कचड़े को निरंतर नहीं उठाती निगम कर्मचारी

जिससे इस चौक का सौंदर्यीकरण हो सकें इस चौक में बहुत ही ट्राफिक दबाव जाम कि स्थिति निर्मित रहती हैं और चारों तरफ से लोगों का आना जाना लगा रहता है इस चौक के स्ट्रीट लाइटें एवं सिग्नल बंद पड़ी हैं
कुछ दिनों पहले इसी चौक में एक तेरह साल कि बच्ची का ट्रक कि चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई थी इसलिए इस चौक में एक पुलिस चौकी का भी होना बहुत ही आवश्यक हैं क्योंकि इस धड़ल्ले से अवैध शराब, गांजा बेचा जाता हैं।
पोटिया चौक के उपस्वास्थ्य केंद्र के सामने पार्किंग व्यवस्था नहीं मरीजों को गाड़ियों को रोड़ पर खड़ा करने को मजबूर

पोटिया कला चौक में उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक शाला स्कूल एवं शीतला माता मंदिर,शिव जी, हनुमानजी के मंदिर स्थापित हैं।
और सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार शासकीय स्थानों से सौ से दो सौ मीटर के दूरी तक शराब दुकानों मांसमटन से लेकर किसी भी प्रकार के पानमसाले एवं चखने कि दुकानें ब्रिक्री करने को लेकर प्रतिबंध हैं।
लेकिन उसके बाद भी यहां धड़ल्ले से बेचा जा रहा है कुछ अधिकारियों एवं नेताओं के मिलीभगत व चंद पैसे कि लालच में आखिर इन व्यापारियों को बेचने के अनुमति किसने दिया
आज इस चौक कि हालत बहुत हीं दयनीय व खराब स्थिति निर्मित हैं। इस चौक का सौंदर्यीकरण होना बहुत हीं आवश्यक व जरुरी हैं।
मुक्तिधाम जाने के मार्ग बहुत ही खराब एवं किचड़ो से भरा हुआ

पोटिया कला एक ऐसा क्षेत्र व वार्ड है जहां हर साल कबीर साहेब का त्रिदिवसीय प्रवचन कार्यक्रम होता हैं। इस क्षेत्र में 70/ सत्तर फीसदी साहू बहुमूल्य क्षेत्र हैं। पोटिया कला में प्रवेश करने के बाद आपको किसी भी कोई भी दुकानों में आपको मांसमटन बेचते दिखाई नहीं देंगे साथ ही इस क्षेत्र में यहां तक अंडा भी बेचना सख्त मना हैं।
पोटिया कला चौक में सर्व समाज द्वारा मांसमटन के कारोबार को बंद कराने या दुसरे जगह स्थानांतरण करनें को लेकर एक दिवसीय आंदोलन भी किया गया था लेकिन वार्ड पार्षद द्वारा व्यापारियों के साथ जाकर आयुक्त से उस दुकानों को चालू रहने कि अपील कि गई जिस वजह से आज तक उस दुकानों को बंद या स्थानांतरण नहीं किया गया
इसलिए इस पोटिया कला चौक में कबीर साहेब का भव्य प्रवेश द्वार बनाने कि मांग को लेकर इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के अलावा शासन प्रशासन को अवगत भी कराया गया है

उसके भी आज तक प्रवेश द्वार बनना दूर कि बात इस चौक में पार्षद एवं निगम प्रशासन के आर्शीवाद से रोड़ तक खुलेआम धड़ल्ले से मांसमटन बेचा जाता हैं
और न ही इस दुकानों को दुसरे जगह स्थानांतरण करनें को लेकर आज तक निगम प्रशासन द्वारा कोई पहल कि गई हैं। बहुत ही गंभीर एवं चिंता का विषय हैं।



