निगम प्रशासन द्वारा ठेकेदार का बैंक चेक लगाते समय उनका ध्यान आकर्षित किया गया था या नहीं या फिर कोई समय सीमा तय कि गई थी या फिर बीना जानकारी दिए बैंक चेक लगा दिया गया दोनों के साथ ऐसे कौन सी नियम शर्तें लागू हुई जांच का विषय बना
दुर्ग शहर निगम क्षेत्र के अंतर्गत सुत्रो के अनुसार मिली जानकारी के मुताबिक अभी-अभी कुछ दिनों पहले इंदिरा मार्केट बाजार में वाहन पार्किंग स्थल का टेंडर निकाला गया था जहां कुछ लोगों द्वारा टेंडर भी भरा गया जिसने सबसे ज्यादा बोली लगाई गई उसे इंदिरा मार्केट का वाहन पार्किंग टेंडर दिया गया
आपको बता दें कि इंदिरा मार्केट का वाहन पार्किंग टेंडर लगभग चौदह लाख रुपए में एक वर्ष के लिए ठेके पर लिए गए हैं। जिस व्यक्ति ने इंदिरा मार्केट वाहन ठेका जिन्होंने ठेके पर लिया गया है उसने दुर्ग नगर निगम के नाम से निगम प्रशासन को चेक प्रदान किया गया था 
और वाहन ठेका लगभग एक माह से शुरू भी हो गया है। जब निगम प्रशासन द्वारा उस वाहन पार्किंग ठेकेदार का चेक को बैंक में लगाया गया तो देखा गया कि उस ठेकेदार के खाते में पैसा ही नहीं था या फिर कुछ और कारणवश बैंक में पैसा रहने के बाद भी खाते से नहीं कट पाया होगा ये तो बैंक डिटेल लेने पर ही पता चल पायेगा
आपको बता दें कि लगभग करीब 14,00,000 चौदह लाख रुपए में एक वर्ष हेतु दुर्ग शहर स्थित इंदिरा मार्केट कि जगह को वाहन पार्किंग के लिए टेंडर पर ली गई थी आखिर चूक किसकी हुई ठेकेदार या फिर नगर निगम जांच करने पर ही पता चल पायेगा
लेकिन ठेकेदार द्वारा लगभग एक माह से इंदिरा मार्केट का पार्किंग स्थल से ग्राहकों का पार्किंग का पैसा वसुला जा रहा है। क्या पार्किंग का पैसा निगम प्रशासन को वापस करेंगे कि नहीं ये तो निगम प्रशासन के ऊपर निर्भर करता है। ऐसे कितने ठेकेदारों होंगे जो निगम को चुना लगाकर बैठे हैं। निगम प्रशासन को ऐसे ठेकेदारों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए कोई ऐसी दुबारा गलती करने हेतु दसों बार सोचें
कि किस कारण से बैंक से पैसा नहीं कटा क्या निगम प्रशासन पार्किंग ठेकेदार पर कार्यवाही करेंगे या फिर कार्यवाही के नाम लीपा-पोती या फिर उस ठेकेदार का दोबारा दुसरी चेक लगाऐंगे या फिर उस पार्किंग ठेकेदार के टेंडर को निरस्त कर दुसरी बार टेंडर निकाला जायेगा ये तो आने वाले वक्त ही बताएगा
जिस समय इंदिरा मार्केट के पार्किंग का टेंडर प्रक्रिया शुरू कि गई और जिस ठेकेदार को पार्किंग का टेंडर दिया गया उस समय जब ठेकेदार द्वारा निगम प्रशासन को बैंक चेक प्रदान किया गया था तो उसी समय जिस बैंक का चेक प्रदान किया गया
उस समय उसी बैंक का मिनी स्टेटमेंट या फिर बैंक द्वारा जारी बैंक स्टेटमेंट मंगाने से यह पता चल जाता कि जिस बैंक का चेक दिया गया था उस बैंक खाते में पैसा जमा हैं या नही दूध का दूध और पानी का पानी ताकि किसी को गुमराह कि स्थिति पैदा निर्मित नहीं होती
निगम प्रशासन द्वारा ठेकेदार का बैंक चेक लगाते समय उनका ध्यान आकर्षित किया गया था या नहीं या फिर कोई समय सीमा तय कि गई थी या फिर बीना जानकारी दिए बैंक चेक लगा दिया गया दोनों के साथ ऐसे कौन सी नियम शर्तें लागू हुई जांच का विषय बना 

