रविशंकर स्टेडियम में श्री राम लीला नहीं हुआ और न ही कोई खास आतिशबाजी हुई वी आई पी पास कार्ड एवं दर्शकों के लिए बैठने कि सुविधाएं उपलब्ध नहीं केवल गिनती के रहे 60 वर्ष पुर्ण हुई
दुर्ग स्थित रविशंकर स्टेडियम में राष्ट्रीय दशहरा पर्व उत्सव समिति द्वारा साठ वर्षों से। प्रति वर्ष कि भाती इस वर्ष भी दशहरा पर्व बड़ी धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया गया। आपको बता दें कि इस दशहरा उत्सव कार्यक्रम को देखने दुर्ग शहर के आलावा अलग-अलग क्षेत्रों से लगभग लाखों लोग शामिल हुए।
समिति के द्वारा लगभग पचास फिट के रावण का पुतला तैयार किया गया था। करीब आठ बजे के आसपास श्री राम और रावण के दल कार्यक्रम स्थल पहुंचे। उसके बाद दर्शकों के साथ फोटो खिंचवाने लगें। तत्पश्चात श्री राम और रावण के दोनों दल रावण के पुतले के पास पहुंचे और दो मिनट के लिए श्री राम और रावण के बीच युद्ध हुआ।
और कुछ ही मिनट के अंदर रावण के पुतले को आग लगा दिए गए। करीब नौ बजे के आसपास रावण के बने पुतले को जलाए गए। इस तरह से साठ वर्षों के मेहनत में पानी फिरते दिखाई दिए। कारण आपको बता दें कि रविशंकर स्टेडियम में दशहरा उत्सव का कार्यक्रम होते लगभग साठ वर्ष हो चुके हैं।
और दर्शकों द्वारा समय निकालकर बड़ी उत्सुकता से कार्यक्रम देखने अपने फैमिली को लेकर आते दिखाई दिए। रविशंकर स्टेडियम में रावण का पुतला दहन किया जाता है। यहां तीन घंटे का राम लीला नहीं होता केवल श्री राम और रावण के बीच लास्ट कड़ी वाला थोड़ी सी युद्ध हुआ।
उसके बाद रावण का पुतला दहन किया गया। लाखों लोगों द्वारा स्टेज को निहारते दिखाई दिए कि श्री राम और रावण का लीला स्टेज पर कब चालू होगा। लेकिन बड़ी दुर्भाग्य कि बात यह है। कि श्री राम लीला करने के लिए बड़ा स्टेज नहीं बना था। एक छोटी सी स्टेज बनाया जिसमें अतिथियों द्वारा कुछ लोगों को सम्मानित करते दिखाई दिए।
दशहरा उत्सव पर्व के लिए पास कि व्यवस्था रखी गई लेकिन अतिथियों दर्शकों एवं श्री राम लीला करने के लिए मंच कि उच्चतम बैठने कि सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं यहां श्री राम लीला नहीं हुआ और न ही कोई खास आतिशबाजी हुई 
जबकि खासबात तो यह है कि वी ई पी लोगों के लिए पास कि व्यवस्था भी रखी गई थी। इस प्रकार लोगों ने बीना रामायण लीला देखें बीना ही अपने उदासीनता चेहरे में मायूसी लेकर चले गए। इस तरह से दुर्ग शहर वासियों के लिए रविशंकर स्टेडियम का साठ वर्षों का दशहरा उत्सव पर्व फैल साबित हुई।

