क्या उस दो वर्ष कि र्छोटी सी मासूम दुधमुंही बच्ची एक सप्ताह में 70 से 1,00,000 लाख कि दावाई खा या पी चुकी होगी आईसीयू रुम कि सीसीटीवी फुटेज कैमरे चेक किया जाएं…
आज जिला अस्पताल दुर्ग को फीडबैक लेने कि क्यों आवश्यकता पढ़ रही हैं। एक तरफ मरीजों से फीडबैक तो वही दुसरी ओर मरीजों के साथ इलाज को लेकर अभ्रद्र व्यवहार करने के मामला कइयो बार सुनने में आई है।
जिला हास्पिटल के डाक्टरों एवं प्राईवेट हास्पिटल के डाक्टरों दोनों कि मिलीभगत से आज एक छोटी सी मासूम बच्ची को अपनी जांन गवानी पड़ी
परिवारजनों के अनुसार डाक्टरों पर आरोप लगाते हुए बजरंग नगर दुर्ग निवासी परिधि निर्मलकर उम्र लगभग दो वर्ष कि अचानक तबियत बिगड़ी
पर उनकी माता संतोषी पति प्रेम निर्मलकर द्वारा अपने बच्चे को जिला अस्पताल दुर्ग ले जाया गया करीब एक से दो दिनों तक रहने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ
लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टरों द्वारा बच्चे के माता-पिता को दुसरे हास्पिटल ले जाने एवं बीमार बच्चे को लाई हो करके बार बार बोलने कि बात सामने आई हैं।
जिला हास्पिटल के डाक्टरों द्वारा बच्चे के स्थिति को नाजुक बताते हुए दुसरे हास्पिटल ले जाने एवं अपने परिचित कि हास्पिटल ले जाने कि बात कही
और थोड़ी ही देर में दुसरे हास्पिटल से फोन आया और उस दुसरे हास्पिटल के डाक्टरों ने उस बच्ची को पुरी तरह से ठीक करने कि बात कही और ये यह भी कहा कि हमारे यहा आयुष्मान कार्ड के द्वारा इलाज होने कि बात कहते हुए अपने ऐम्बुलेंस से कलर्स चिल्ड्रेन हास्पिटल आदर्श नगर दुर्ग लाया गया
बच्ची को भर्ती लेने से पैसा भी डिपाजिट कराई गई उसके बाद बेंड चार्ज एवं डाक्टरों कि फिस सहित लगभग एक दिन का लगभग बाहर हजार लेने कि मामला सामने आईं
करीब एक सप्ताह होने लगी और इधर बच्ची को आईसीयू में रखी गई थी धीरे-धीरे बच्ची कि तबियत और ज्यादा बिगड़ने लगी और न ही बच्ची को परिजनों को देखने देते थे।
एक शाम जब परिजनों ने बच्ची को देखने कि जिद करने लगें तो डाक्टरों द्वारा मना करने कि कोशिश किए गए तो परिजनों ने अपने परिचितों को लेकर आया और बच्ची को देखने कि जिद किए गए तो हास्पिटल के डाक्टरों द्वारा पद्मनाभपुर थाना को सुचित कर हास्पिटल में तोड़फोड़ होने कि आशंका जताई और थाना में परिजनों के नाम से लेटर के माध्यम से शिकायत कर पुलिस कि सहायता मांगी
जबकि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था और अपने हास्पिटल के सामने कोई अंदर प्रवेश नकर सके इसलिए दो बाडी विलडर रखी गई
मामला गंभीर होते देख डाक्टरों ने परिजनों को बच्ची कि मौत कि बात कही जबकि लगातार बच्ची कि इलाज में सुधार होने कि बात डाक्टरों द्वारा कही जा रही थी
और परिवारजनों ने कहा लगभग एक सप्ताह में करीब डाक्टरों के फिस बेड चार्ज एवं दवाई खर्च सहित करीब एक 70 से 1,00,000 रुपए खर्च कर चुके थें
इस तरह से डाक्टरों कि किसी कि मजबूरियों का इस तरह फायदा उठाते दिखाई दिए आपको बता दें कि सुत्रो के अनुसार यह कलर्स चिल्ड्रेन अस्पताल एक कांग्रेसी नेता का हैं।
और इस अस्पताल के ओपनिंग के समय कांग्रेस के दिग्गज नेताओं द्वारा सम्पन्न हुआ था इसलिए ऐसे हास्पिटल पर कार्यवाही नहीं होगी जिला अस्पताल के कुछ डाक्टरों द्वारा सरकार के तनख्वाह खाते हैं। और काम प्राईवेट हास्पिटल के लिए करते दिखाई देते हैं।
इस मामले में जिला प्रशासन को संज्ञान में लेनी चाहिए लेकिन जिला प्रशासन द्वारा निरक्षण करना उचित नहीं समझते तो कार्यवाही करना बहुत दूर कि बात है।
क्या उस दो वर्ष कि र्छोटी सी मासूम दुध मुहीम बच्ची एक सप्ताह में 70 से 1,00,000 लाख कि दावाई खा या पी चुकी होगी आईसीयू रुम मे लगे सीसीटीवी फुटेज कैमरे चेक किया जाएं कि सात दिनों में डाक्टरों द्वारा चेकअप के दौरान क्या क्या खिलाई पिलाई गई
परिजनों द्वारा डाक्टरों पर आरोप लगाते हुए पद्मनाभपुर थाना में जांच कर कार्रवाई कि मांग कि गई
जिला प्रशासन द्वारा इन प्राईवेट अस्पतालो पर कार्यवाही करेंगी या फिर कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति तो नहीं होगी क्या उन गरीब परिवारजनों को न्याय मिल पायेगी क्योंकि आज तक दुर्ग शहर में एक्सीडेंट से लेकर कई घटनाएं हुई अधिकतर लोगों को न्याय कि गुहार लगाते दिखाई दिए 
चंद पैसे कि चाह में लोगों द्वारा अपनी इमान बेच देना इसलिए हमने पहले ही कहा था कि जिला अस्पताल गरीबों के लिए नहीं अमीरों के लिए वरदान साबित हुई

